Thursday, December 19, 2024

क्या एक बार फिर से ठगे गए अंबेडकरवादी?

 (( क्या एक बार फिर से ठगे गए अंबेडकरवादी?))


लंबे समय से सन्नाटा पसरा था.... कोई मौका ही नहीं मिल रहा था कि हो-हल्ला मचाया जाए, लोगों को बरगलाया जाए.... आंबेडकर के नाम पर राजनीति की सौदेबाज़ी की जाए और आंबेडकर के नाम पर अंबेडकरवादियों को ही ठगा जाए। ऐसा लग रहा था कि इस साल को सन्नाटे में ही खत्म हो जाना लिखा है.....

लेकिन फिर एक दिन मौका आया..…संसद के राज्यसभा सदन में गृहमंत्री Amit Shah संविधान की गौरवशाली यात्रा विषय पर अपनी बात सदन पटल पर रख रहे थे। साथ-साथ विपक्ष में बैठे राजनीतिक दलों की पोल भी खोल रहे थे‌, कि आखिर कैसे बड़े ही चालाकी से अंबेडकर के नाम पर लोगों को ठगने का कार्य प्रगति पर है! कैसे लंबे समय तक सत्तासीन रही और अभी विपक्ष में बैठी कांग्रेस बाबासाहेब आंबेडकर को अपमान करते आई है.... आखिर क्यों आंबेडकर को अपने समय में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.....जिस संविधान की प्रति लेकर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता संसद के साथ-साथ सार्वजनिक मंचों पर लहराते नज़र आते हैं, अपनी कुर्सी बचाने के लिए कैसे संविधान को ही मज़ाक बनाकर रख दिया था..... आंबेडकर को अपनाने और उन्हें भारतरत्न से सम्मानित करने में कांग्रेस को इतना वक्त क्यों लग गया.... धर्म के आधार पर देश के दो हिस्सों में बांटने के फैसले का विरोध करने वाले भीमराव आंबेडकर को तब क्यों नहीं सुना-समझा गया... देशहित के कई मुद्दों पर अंबेडकर को क्यों कांग्रेस की नज़रअंदाज़गी झेलनी पड़ी?? 

विपक्ष में बैठी कांग्रेस और उसकी सहयोगी राजनीतिक पार्टी गृहमंत्री अमित शाह के हर सवाल पर सहमी नज़र आ रही थी....इस पोल खोल रूप को देखकर बीच-बीच में कई वरिष्ठ नेता बौखला भी गए कि आखिर गृहमंत्री जी को एक ही दिन में विपक्ष को इतना छीलने की क्या ही जरूरत आन पड़ी.... वैसे भी साल ख़त्म होने को है, कुछ सच्चाई अगले साल के लिए भी रहने देते! एक ही दिन में इतना बखिया उधेड़ने पर क्यों तुले हैं.....एक तो मौका नहीं हाथ लग रहा, ऊपर से तरकस से लगातार शब्दभेदी बाण से छलनी किए जा रहे हैं.... कोई इतना बेरहम कैसे हो सकता है!!

तभी मन ही मन त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे विपक्षी पार्टियों को गृहमंत्री अमित शाह के वक्तव्य में एक उम्मीद की किरण दिखाई दी.... उनकी आंखें चमकी जैसे संजीवनी मिल गई हो! ये उम्मीद की किरण के बजाए 'मौके की किरण' कही जाए तो ज़्यादा न्यायसंगत होगा। करीब डेढ़ घंटे के भाषण में पोल खोल गृहमंत्री जी की 11 सेकेंड की वक्तव्य सुनकर विपक्षी खेमे के 'माननीय' का मन एकदम से लोटने-पोटने लगा। दिमाग में हरकत की बत्ती जलने-बुझने लग गई.... वजह, एक बार फिर से अंबेडकरवादियों को अंबेडकर के नाम पर ही ठगने का... बरगलाने का मौका साफ़ नज़र आ रहा था।

संसद से बाहर निकलते ही विपक्ष के सभी 'माननीय' अपने टेक्निकल टीम को एक्टिव होने का हुक्म सुनाया.... इसके साथ ही सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की टेक्निकल फौजें एक्टिव हो गई।

विपक्षी टीम के टेक्निकल फौजों को भी #BJP के तथाकथित IT सेल के फौजों से दो-दो हाथ करने की 'मौके की आग' दिखी.... अपने हुक्मरानों को भी साबित करना था कि देखिए अपने टेक्निकल फौजों को इतना भी निकम्मा-निकठ नहीं समझिए। कुछ देर में #babasahebambedkar #तड़ीपार_माफ़ी_मांग #ambedkar हैशटैग ट्रेंड करने लगा। माहौल बन चुका था.... सभी के सभी विपक्षी 'माननीयों' ने सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर इस बात की गवाही दी कि गृहमंत्री अमित शाह ने आंबेडकर का अपमान किया है....उनकी 11 सेकेंड की वक्तव्य की आधी-अधूरी वीडियो क्लिप इस बात की तस्दीक करती है....

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की टेक्निकल फौजों ने साबित किया कि अब हम भी किसी से कम नहीं हैं....उनका ये साबित करना जायज़ भी है और इस खुराफात के लिए पीठ भी थपथपाए जाने चाहिए! उन्हें कोई अजीज़ विशिष्ट टाइप का पुरस्कार भी दिया जाना चाहिए जो कि आनन-फानन में गृहमंत्री अमित शाह को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर मजबूर कर दिया। 

मज़े की बात ये है कि एक तरफ खुद को अंबेडकरवादी मानने वाले सैकड़ों-हजारों लोग फिर से सड़क पर उतरने की हुंकार भर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अंबेडकर के नाम पर लोगों को छलने वाले लोग इस खुशी में हैं कि अंबेडकरवादियों को इस बात की ज़रा भी इल्म नहीं कि वो फिर से ठगे जा रहे हैं....

अंत में यही कहना चाहूंगा कि खुद से पढ़ना-लिखना बहुत ज़रूरी है.... अगर वाकई डॉ भीमराव आंबेडकर पढ़े-समझे गए होते तो आज ये विडंबना नहीं देखना पड़ता। आंबेडकर की आत्मा भी अपने को अंबेडकरवादी कहने वाले लोगों को देखकर तड़प रही होगी.... साथ ही ये भी देख रही होगी कि कैसे इस देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां और लोग फायदे के हिसाब से अपने-अपने कई अंबेडकर गढ़े हैं !


जय हो!!

Thursday, December 12, 2024

ये हत्यारी न्याय प्रक्रिया....

 पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की तस्वीरें और वीडियो वायरल है। #BengaluruSuicideCase #divorce #JusticeForAtulSubhash जैसी तमाम हैशटैग ट्रेंड में है। लेकिन मसला ये है कि क्या जिस सिस्टम की वजह से अतुल को अपनी जान गंवानी पड़ी.... उसमें कुछ तब्दीली होगी या अतुल की सुसाइड महज़ कुछ दिनों के लिए ट्रेंडिंग खब़र बनकर रह जाएगी?? क्या न्याय व्यवस्था और कानून प्रक्रिया पर एक बार फिर से नए सिरे से विचार-विमर्श की जरूरत समझी जाएगी या फिर किसी नए अतुल का इंतज़ार रहेगा?? 

ये बहुत दुर्भाग्य है कि आज़ादी के करीब 76 साल बाद भी न्याय व्यवस्था एक हंसते-खेलते परिवार की खुशी लील गई!! जिस उम्र में बुजुर्ग माता-पिता का सबसे भरोसेमंद बैसाखी उसका बेटा होता है, सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों की वजह से उस भरोसेमंद बैसाखी को हमेशा-हमेशा के लिए टूट जाना पड़ा...…और न जाने आगे कितने अतुल सुभाष जैसे भरोसेमंद बैसाखी को टूटकर खत्म हो जाना अभी बाकी है!

उम्मीद तो कम है लेकिन फिर भी यह देखना होगा कि न्याय के अंतिम दरवाजे सुप्रीम कोर्ट और देश के तमाम न्यायविद् व जिम्मेदार लोग इस मामले के बाद कोई ठोस कदम उठाते हैं या इंजीनियर अतुल सुभाष का मामला बस केस नंबर के रूप में दर्ज होकर रह जाएगा.....


एक मशहूर शेर है...


"जलते घरों को देखने वालों 

फूंस का छप्पर आपका है...

आग के पीछे तेज़ हवा है 

आगे मुकद्दर आपका है... 

उसके क़त्ल पर मैं भी चुप था 

अब मेरी बारी आई...

मेरे क़त्ल पर तुम भी चुप हो 

अगला नंबर आपका है!!"

Tuesday, October 29, 2024

धनतेरस में धन ही नहीं स्वास्थ्य की भी चिंता

 ( धन ही नहीं, स्वास्थ्य की चिंता भी करता है धनतेरस )


मुतरेजा जी बड़ा प्रसन्न हैं। आज उन्हें गिन्नी ख़रीदनी है। गिन्नी यानी स्वर्ण मुद्रा। मैंने पूछा क्यों खरीदेंगे गिन्नी? मुतरेजा मेरे अज्ञानता पर हंसे। कहने लगे धनत्रयोदशी यानी धनतेरस पर सोना-चॉंदी खरीदने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। घर में उनके आने का रास्ता प्रशस्त होता है। कल धनतेरस है। जो सोना चाँदी नहीं खरीद पाते, वे बर्तन खरीदते हैं। मैं मुतरेजा के ज्ञान से अचंभित था। मुतरेजा सकुचाते और लजाते हुए बोले- सर, सोना खरीदने से लक्ष्मीजी तो प्रसन्न होती ही हैं...बीवी भी प्रसन्न होती है। मुतरेजा अभी वैवाहिक जीवन के स्वर्णकाल में चल रहे हैं। 

मैंने कहा- मुतरेजा सही है, धनतेरस दीपावली की दस्तक है। हम धनतेरस की चौखट पर खड़े होकर दीपावली की तरफ देखते हैं। इसलिए धनतेरस को लक्ष्मीजी से जोड़ते हैं। 

लेकिन यह स्वास्थ्य का पर्व है। दरअसल धनतेरस स्वास्थ्य और समृद्धि के बीच जागरूकता का पर्व है। हम धनतेरस को सिर्फ़ सोना, चॉंदी और बर्तन खरीदने का अवसर समझते हैं और इसे लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का ज़रिया मानते हैं। लेकिन धनतेरस लक्ष्मीपूजा और नए बर्तन खरीदने के कर्मकांड के साथ ही आयुर्वेद के प्रणेता व वैद्यकशास्त्र के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी है। शास्त्रों में इसका यही महत्व है। क्योंकि हमारे शास्त्र स्वास्थ्य को भी धन मानते हैं। धन्वंतरि की गिनती भारतीय चिकित्सा पद्धति के जन्मदाताओं में होती है।वेदों में इनका उल्लेख है। पुराणों में इन्हें विष्णु का अवतार कहा गया है। समुद्रमंथन में जो चौदह रत्न निकले, उनमें एक धन्वंतरी भी थे। वे काशी राजधन्य के पुत्र ‌थे, इसलिए ‘धन्वंतरि’ कहलाए।

पर मुतरेजा ये सब मानने को तैयार नहीं थे। वे कहने लगे कि आप शास्त्र की बात करते हैं मैं परम्परा की। हमारे यहॉं परम्परा से सोना खरीदा जाता है। ऐसा कर दादा जी दादी को, पिता जी माता जी को प्रसन्न करते थे। मैं पत्नी की प्रसन्नता के लिए ऐसा करूँगा।परम्परा के प्रति मुतरेजा की जकड़न को देख मैंने कहा ज़रूर खरीदें पर कथा सुनाता हूँ। 

आज ही के रोज़ धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर निकले थे। वे हिन्दू धर्म में मान्य देवताओं में से एक हैं। वे आयुर्वेद के प्रणेता और वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। महाभारत, श्रीमदभागवत, अग्निपुराण, वायुपुराण, विष्णपुराण तथा ब्रह्मपुराण में उनका ज़िक्र है। श्रीमद्भागवत में विष्णु के जो 24 अवतार बताए गए हैं, उनमें धन्वंतरि 12वें अवतार हैं। समुद्र मंथन में शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती लक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिए दीपावली के दो दिन पहले धन्वंतरी का जन्म धनतेरस के रूप में मनाते हैं। इसी दिन इन्होंने आयुर्वेद का प्रादुर्भाव किया था। 

भगवान विष्णु के रूप की तरह धन्वन्तरि की भी चार भुजाएं हैं। उपर की दोनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुए हैं। जबकि दो अन्य भुजाओं में से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे में अमृत कलश लिए हुए हैं। इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है। इसीलिए धनतेरस को पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इन्‍हे आयुर्वेद की चिकित्सा करने वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं- आयुर्वेद अथर्ववेद का उपवेद है।


* सुश्रुत संहिता के अनुसार-

ब्रह्मा प्रोवाच ततः प्रजापतिरधिजगे,

तस्मादश्विनौ, अश्विभ्यामिन्द्रः इन्द्रादहमया

त्विह प्रदेपमर्थिभ्यः प्रजाहितहेतोः

यानी  ब्रह्मा ने एक लाख श्लोक का आयुर्वेद रचा जिसमें एक हजार अध्याय थे। उनसे प्रजापति ने, प्रजापति से अश्विनी कुमारों ने, अश्विनी कुमारों से इन्द्र ने और इन्द्र से धन्वन्तरि ने पढा। धन्वन्तरि से सुनकर सुश्रुत मुनि ने आयुर्वेद की रचना की।

* नालन्दा विशाल शब्दसागर के अनुसार-

धन्वन्तरि प्रणीत चिकित्साशास्त्र वैद्य विद्या ही आयुर्वेद है। वायु तथा ब्रह्माण पुराणों में धन्वन्तरि को आयुर्वेद का उद्धारक बताया गया है। पौराणिक काल में धन्वन्तरि भगवान के रुप में पूजनीय थे- 'धन्वन्तरिभगवान् पात्वपथ्यात्'। चरक संहिता में भी धन्वन्तरि को आहुति देने का विधान है।

धन्वन्तरी काशी के राजा थे। पुराणों में काशिराज दिवोदास का एक नाम धन्वन्तरी कहा जाता है। सुश्रुत ने शल्यशास्त्र के अध्ययन की इच्छा प्रकट की थी, इसलिए धन्वन्तरि ने इसी अंग का उपदेश दिया। सुश्रुत के पांच स्थानों में (सूत्र, निदान, शरीर चिकित्सा और कल्प में) शल्य विषय ही प्रधान है, इसीलिए कुछ लोगों ने धन्वन्तरि शब्द का अर्थ ही शल्य में पारंगत किया है। (धनुः शल्यं तस्य अन्तं पारमियर्ति गच्छतीति धन्वन्तरिः) 

बाद में धन्वन्तरि एक सम्प्रदाय बना,  जिसका संबंध शल्य शास्त्र से है। जो भी शल्य शास्त्र में निपुण होते थे, उन सबको धन्वन्तरि कहा जाता था। इसी से चरक संहिता में धन्वन्तरीयाणां बहुवचन मिलता है। स्पष्ट है, आदि उपदेष्टा धन्वन्तरि थे। इन्हीं के नाम से यह अंग चल पड़ा।


* गरुण और मार्कंडेय पुराणों के अनुसार

'गरुड़पुराण' और 'मार्कण्डेयपुराण' के अनुसार वेद मंत्रों से अभिमंत्रित होने के कारण ही धन्वंतरि वैद्य कहलाए थे।

* विष्णु पुराण के अनुसार

धन्वन्तरि दीर्घतथा के पुत्र बताए गए हैं। इसमें बताया गया है कि धन्वन्तरि जरा विकारों से रहित देह और इंद्रियों वाला तथा सभी जन्मों में सर्वशास्त्र ज्ञाता है। भगवान नारायण ने उन्हें पूर्व जन्म में यह वरदान दिया था कि काशिराज के वंश में उत्पन्न होकर आयुर्वेद के आठ भाग करोगे और यज्ञ भाग के भोक्ता बनोगे।

*ब्रह्म पुराण के अनुसार-

 काशी के संस्थापक 'काश' के प्रपौत्र, काशिराज 'धन्व' के पुत्र, धन्वंतरि महान चिकित्सक थे, जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। राजा धन्व ने अज्ज देवता की उपासना की और उनको प्रसन्न किया और उनसे वरदान मांगा कि हे भगवन आप हमारे घर पुत्र रूप में अवतीर्ण हों। उन्होंने उनकी उपासना से संतुष्ट होकर उनके मनोरथ को पूरा किया जो संभवतः धन्व पुत्र तथा धन्वन्तरि अवतार होने के कारण धन्वन्तरि कहलाए। जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ।  

इनके वंश में दिवोदास हुए, जिन्होंने 'शल्य चिकित्सा' का विश्व का पहला विद्यालय काशी में स्थापित किया। इसका प्रधानाचार्य, दिवोदास के शिष्य और ॠषि विश्वामित्र के पुत्र 'सुश्रुत संहिता' के प्रणेता, सुश्रुत विश्व के पहले सर्जन (शल्य चिकित्सक) थे। बनारस में कार्तिक त्रयोदशी-धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की पूजा हर कहीं होती हैं।

कैसा अद्भुत इतिहास है इस शहर का! शंकर ने विषपान किया, धन्वंतरि ने अमृत प्रदान किया और इस तरह काशी कालजयी नगरी बन गयी।

धन्वन्तरी के तीन रूप मिलते हैं-

- समुद्र मन्थन से उत्पन्न धन्वन्तरि प्रथम।

- धन्व के पुत्र धन्वंतरि द्वितीय।

- काशिराज दिवोदास धन्वन्तरि तृतीय।

धन्वन्तरि प्रथम तथा द्वितीय का वर्णन पुराणों के अतिरिक्त आयुर्वेद ग्रंथों में भी मिलता है। इसमें आयुर्वेद के आदि ग्रंथों सुश्रुत्र संहिता चरक संहिता, काश्यप संहिता तथा अष्टांग हृदय में विभिन्न रूपों में उल्लेख मिलता है। इसके अतिरिक्त अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों भाव प्रकाश, शार्गधर तथा उनके ही समकालीन अन्य ग्रंथों में आयुर्वेदावतरण का प्रसंग उधृत है। इसमें भगवान धन्वन्तरि के संबंध में भी प्रकाश डाला गया है।

वैदिक काल में जो महत्व और स्थान अश्विनी कुमार को था, वही पौराणिक काल में धन्वंतरि को प्राप्त हुआ। जहाँ अश्विनी के हाथ में मधुकलश था, वहाँ धन्वंतरि को अमृत कलश मिला। क्योंकि विष्णु संसार की रक्षा करते हैं। अत: रोगों से रक्षा करने वाले धन्वंतरि को विष्णु का अंश माना गया।  विषविद्या के संबंध में कश्यप और तक्षक का जो संवाद महाभारत में आया है, वैसा ही धन्वंतरि और नागदेवी मनसा का ब्रह्मवैवर्त पुराण (३.५१) में आया है।  उन्हें गरुड़ का शिष्य कहा गया  है-

'सर्ववेदेषु निष्णातो मन्त्रतन्त्र विशारद:।

शिष्यो हि वैनतेयस्य शंकरोस्योपशिष्यक:।। (ब्र.वै.३.५१)

जिन्हे वासुदेव धन्वंतरि कहते हैं, जो अमृत कलश लिए हैं, सर्व भयनाशक हैं, सर्व रोग नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं और उनका निर्वाह करने वाले हैं; उन विष्णु स्वरूप धन्वंतरि आप सब लोगों के आरोग्य की रक्षा करें । पर मुतरेजा मानने को तैयार नहीं हैं। वे ज़रूर किसी सोने-चाँदी की दुकान में पाए जाएंगे। 


 काशी में धन्वन्तरी जी का मंदिर भी है।

(हेमंत शर्मा जी के FB पेज से)

Sunday, October 22, 2023

हर पार्टी की अपनी महत्वाकांक्षा: कांग्रेस सपा कलह पर आरजेडी सांसद मनोज झा

 मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा समाजवादी पार्टी को एक भी सीट न दिए जाने पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिफर पड़े। अखिलेश यादव ने नाराज होते हुए शुक्रवार को कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी को कोई सलाह या सुझाव नहीं दे रहा हूं लेकिन देश के सामने बड़ी चुनौती है। बीजेपी एक बड़ी पार्टी है और यह बहुत ही संगठित है। इसलिए किसी भी पार्टी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। भ्रम से लड़कर आप कोई चुनाव नहीं जीत पाएंगे। दरअसल अखिलेश यादव का कहना है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को छह सीट देने पर सहमति जताई थी। लेकिन कांग्रेस ने जब उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तब उसमें एक भी सीट समाजवादी पार्टी के लिए नहीं दी गई। इसके उलट समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधायकों का भी टिकट काट दिया गया है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के साथ कौन खड़ा होगा।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर गठबंधन सिर्फ 2024 में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए है तो इस पर विचार किया जाएगा। कांग्रेस जैसा व्यवहार सपा के साथ करेगी, उसके साथ वैसा ही किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से पत्रकारों ने इस संदर्भ में राय जाननी चाही तो 'छोड़ो... अखिलेश-विखलेश' कहते हुए सवाल से कन्नी काट ली।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच उत्पन्न कलह पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा का बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने चुटकी लेते हुए कहा कि अवसरवादी गठबंधन में स्वार्थ का टकराव होना था और ये हो गया। रविशंकर प्रसाद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'यह तो होना ही था, वे बीजेपी को हराने की कोशिश कर रहे हैं और उनके बीच एक-दूसरे के लिए कोई शिष्टाचार नहीं है।'

वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा का भी कांग्रेस-सपा कलह पर बयान सामने आया है। मनोज झा ने कहा कि 'चुनाव के दौरान ऐसा होता है, हर पार्टी की अपनी महत्वाकांक्षा होती है। मैं टाॅप लीडरशिप से आग्रह करूंगा कि इन सब को बेहतर ढंग से सुलझाया जाए क्योंकि लोग बहुत लालसा से इस विकल्प की ओर देख रहे हैं। हमारी कोशिश रहेगी कि इस तरह की छवि न आए।'

गौरतलब है कि 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के केंद्र सरकार के खिलाफ 28 विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर गठबंधन में लड़ने का फैसला किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस, आरजेडी के साथ साथ समाजवादी पार्टी समेत तमाम पार्टियां घटक इकाई के रूप में शामिल हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच ठनी विवाद गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

Wednesday, November 16, 2022

नाटो देश पोलैंड में घुसी रूसी मिसाइल, दो लोगों की मौत

 नाटो देश पोलैंड में घुसी रूसी मिसाइल, दो लोगों की मौत

अंतरराष्ट्रीय/राजनीति 

फ्रांस की न्यूज एजेंसी AFP के हवाले से खबर है कि रूसी मिसाइल नाटो सदस्य देश पोलैंड के पुर्वी हिस्से में घुस गई जिसके जद में आकर दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस विस्फोट से हुई जनहानि में मौत का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है। पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने मिसाइल का रूसी निर्मित  होने का दावा किया है। इस मिसाइल हमले के बाद पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आगे की जांच और रणनीति के लिए बातचीत की है। इंडोनेशिया के बाली में हो रहे जी 20 शिखर सम्मेलन में शामिल अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने आज जी 7 सदस्य देशों के साथ भी पोलैंड में गिरी रूसी मिसाइल के बारे में चर्चा की है। जी 7 सदस्य देशों की बातचीत की तस्वीर सामने आई है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों व ब्रिटेन के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत इटली, जर्मनी, जापान, स्पेन और नीदरलैंड्स के नेता शामिल हैं। 

इस बीच पोलैंड पर हुए मिसाइल हमले पर रूस की भूमिका पर संदेह प्रकट करते हुए जो बाइडेन ने यह भी कहा कि इसकी संभावना कम है कि मिसाइल को रूस के तरफ से दागा गया होगा। हम इसकी जांच करेंगे और विभिन्न देशों के राजदूतों की बैठक बुलाएंगे।

बता दें कि हाल ही में खेरसाॅन से रूसी सेना की वापसी के ऐलान के बाद पिछले नौ महीने से ज़ारी रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के पहल के रूप में देखा जा रहा था। रूस के इस फैसला के बाद अमेरिका ने भी उम्मीद जताई थी कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है। 

लेकिन पोलैंड पर तथाकथित रूसी मिसाइल हमले के बाद एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। पोलैंड नाटो (North Atlantic Treaty Organization) का सदस्य देश है और रूस का यह मिसाइल हमला नाटो सदस्य देशों के खिलाफ माना जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इस रूस यूक्रेन युद्ध की कड़ी में पोलैंड पहला नाटो सदस्य होगा जिसपर रूस ने मिसाइल हमला किया है।

संजय राउत: लव जिहाद कहें या कुछ और लेकिन ऐसे लोगों को खुले बाजार में हो फांसी

 संजय राउत: लव जिहाद कहें या कुछ और लेकिन ऐसे लोगों को खुले बाजार में हो फांसी

क्राइम/राजनीति 

देश की राजधानी नई दिल्ली के महरौली में दिल दहलाने वाला श्रद्धा हत्याकांड में हर दिन एक नया खुलासा हो रहा है। इस दर्दनाक हत्याकांड पर उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता सांसद संजय राउत ने अपराधियों को बीच बाजार में फांसी पर लटका देने की बात कही है।  

राउत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्रद्धा की जिस तरह से हत्या हुई है और जो सबूत दिख रहे हैं, उस आधार पर ऐसे लोगों को खुले बाजार में फांसी पर लटका देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इसे लव जिहाद कहें या कुछ और लेकिन लड़कियां हमारी मर रही हैं। इसमें कानून कुछ नहीं करेगा और ऐसे हत्याकांड को रोकने के लिए समाज को ही उतरना पड़ेगा। 

हाल ही में पात्रा चाॅल घोटाला मामला के आरोप में जेल में बंद सांसद संजय राउत बेल पर रिहा हुए हैं। 

गौरतलब है कि लिव इन रिलेशनशिप में रह रही अपनी पार्टनर श्रद्धा के गला घोंटकर हत्या करने के बाद आफताब ने उसके शव को 35 टुकड़े करने की बात कबूली है। उसने शव के टुकड़े को फ्रिज में रखा था। पुलिस पूछताछ में  आफताब ने बताया है कि हर रोज रात को दो बजे शव के टुकड़े को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहा था। देश का दिल कहे जाने वाली राजधानी दिल्ली में यह हत्याकांड इतना भयावह है कि इसे सुनकर हर किसी के होश फाख्ता हो जा रहे हैं।

 फिलहाल दिल्ली पुलिस श्रद्धा हत्याकांड के आरोपी आफताब को गिरफ्तार कर पूरी गुत्थी सुलझाने के दिशा में आगे बढ़ रही है।

Monday, October 10, 2022

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला समेत कई राजनेता सपा सुप्रीमो का करेंगे अंतिम दर्शन

 आज दिन मंगलवार को समाजवादी पार्टी के संस्थापक व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार सैफई गांव में उनके पैतृक आवास पर होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के साथ साथ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत तमाम प्रदेशों के मुख्यमंत्री और राजनेता अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। 


सपा की आवाज थे मुलायम : लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला


सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि वे समाजवादी पार्टी के आवाज़ रहे थे। उनकी 16वीं-17वीं लोकसभा में मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य ठीक ना होने के बावजूद उनका लोकसभा में आना और अपना विचार व्यक्त करना  उनका लोकतंत्र के प्रति आस्था को दर्शाता था। मेरी संवेदना उनके परिवार के साथ है।


मुलायम जी का निधन अपूर्णनीय क्षति : मनोज सिन्हा


जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे। उनके समर्थकों से उम्मीद है कि वह मुलायम जी द्वारा दिखाए गये जनसेवा के रास्ते पर चलेंगे। 


मुलायम की सादगी को हमेशा याद किया जाएगा : गुलाम नबी आजाद 


जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी बनाने वाले वरिष्ठ राजनेता गुलाम नबी आजाद ने सपा सुप्रीमो के निधन शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दुःख की बात है की मुलायम जी आज हमारे बीच नहीं हैं। उनकी सादगी को हमेशा याद किया जाएगा । गुलाम नबी आजाद ने यह भी कहा कि जब तक मुलायम जी राजनीति में रहे, वे हमेशा गरीबों, किसानों और मजदूरों के बीच रहे। हमारी बहुत सारी यादें उनके साथ हैं।


गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हुआ था सपा सुप्रीमो का निधन

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का ईलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। सोमवार लगभग आठ बजकर बीस मिनट के करीब उनका निधन हो गया। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह , आप नेता संजय सिंह समेत तमाम नेता मेदांता अस्पताल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।  जिसके पश्चात पार्थिव शरीर को उत्तर प्रदेश के सैफई गांव में उनके पैतृक आवास पर लाया गया। आज उनका वहीं अंतिम संस्कार होना है।