Wednesday, December 29, 2021

योगी जी के अपराधमुक्त प्रदेश में टेनी महराज

 जब देश के प्रधानमंत्री त्रिवेणी संगम की धरती प्रयागराज से यह उद्घोष कर रहे थे कि प्रदेश के यशस्वी और उर्जावान मुख्यमंत्री योगी जी ने प्रदेश को अपराधमुक्त कर दिया है और अपराधियों को उनके सही जगह पहुंचा दिया है तब मेरे ज़ेहन में गृहराज्यमंत्री के पद पर आसीन अजय मिश्रा टेनी और उनके सुपुत्र 'जूनियर टेनी' की थार करामात कौंध रही थी.  उनके इस दावे में कितनी सच्चाई और ईमानदारी है, यह इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी अपने पद पर बने हुए हैं. इसी मुद्दे को लेकर जब एक राष्ट्रीय स्तर के समाचार चैनल के एक पत्रकार उनसे सवाल  किया तो असंसदीय भाषा की इस्तेमाल करते हुए पत्रकार को झपट्टा मारने की कोशिश की जिसका प्रमाण वायरल वीडियो जगजाहिर है. ऐसा कयास लगाए जा रहे हैं कि इस झपट्टमार  माननीय टेनी के बचाव के पीछे उत्तर प्रदेश की विधानसभा चुनाव और ब्राह्मण वोटों को लुभाने का प्रयास है. मगर सवाल यह है कि क्या वाकई में ब्राह्मण समाज उनके इस प्रयास को स्वीकार करता है बजाए इसके कि अगर टेनी दोषी हैं तो उनपर उचित कार्रवाई होनी चाहिए..?? क्या केंद्र सरकार गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी पर असंसदीय व्यवहार के लिए कार्यवाई न करके गलत संदेश नहीं दे रही है?? एक साल से भी अधिक चले किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए जिस तीन कृषि कानूनों को प्रधानमंत्री मोदी माफ़ी मांगते हुए वापस लेना उचित समझा और केंद्र व राज्य सरकार को आंदोलनकारियों की लगभग हर मांग मानने की सहमति देनी पड़ी. क्या अजय मिश्रा टेनी को गृहराज्यमंत्री के पद से बर्खास्त करने के बजाय उन्हें पद पर बने रहने देने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान वोटों को खोने का डर नहीं है जबकि अजय टेनी लखीमपुर खीरी घटना से ही विवाद में चल रहे हैं जोकि किसान आंदोलन से ही संबंधित है?? ऐसे ही ज़ेहन में उठ रहे कई अन्य सवालों का जवाब समय के साथ ही मिलेगा. बहरहाल माननीय प्रधानमंत्री के अपराध मुक्त प्रदेश होने के दावा के साथ साथ निदा फ़ाज़ली साहब की चंद पंक्तियाँ  मेरे ज़ेहन में तैर रही हैं... 


हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी... 

जिसको भी देखना, कई बार देखना!!


- आलोक रंजन 

Sunday, April 25, 2021

देश कागज़ पर बना नक्शा नहीं होता: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

 

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो 

तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो?

दि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों 

तो क्या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?
यदि हाँ
तो मुझे तुम से कुछ नहीं कहना है।

देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता
कि एक हिस्से के फट जाने पर
बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें
और नदियां, पर्वत, शहर, गांव
वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें
अनमने रहें।
यदि तुम यह नहीं मानते
तो मुझे तुम्हारे साथ
नहीं रहना है।

इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ा
कुछ भी नहीं है
न ईश्वर
न ज्ञान
न चुनाव
कागज पर लिखी कोई भी इबारत
फाड़ी जा सकती है
और जमीन की सात परतों के भीतर
गाड़ी जा सकती है।

जो विवेक
खड़ा हो लाशों को टेक
वह अंधा है
जो शासन
चल रहा हो बंदूक की नली से
हत्यारों का धंधा है
यदि तुम यह नहीं मानते
तो मुझे
अब एक क्षण भी
तुम्हें नहीं सहना है।

याद रखो
एक बच्चे की हत्या
एक औरत की मौत
एक आदमी का
गोलियों से चिथड़ा तन
किसी शासन का ही नहीं
सम्पूर्ण राष्ट्र का है पतन।

ऐसा खून बहकर
धरती में जज्ब नहीं होता
आकाश में फहराते झंडों को
काला करता है।
जिस धरती पर
फौजी बूटों के निशान हों
और उन पर
लाशें गिर रही हों
वह धरती
यदि तुम्हारे खून में
आग बन कर नहीं दौड़ती
तो समझ लो
तुम बंजर हो गये हो-
तुम्हें यहां सांस लेने तक का नहीं है अधिकार
तुम्हारे लिए नहीं रहा अब यह संसार।

आखिरी बात
बिल्कुल साफ
किसी हत्यारे को
कभी मत करो माफ
चाहे हो वह तुम्हारा यार
धर्म का ठेकेदार,
चाहे लोकतंत्र का
स्वनामधन्य पहरेदार।

Tuesday, February 23, 2021

श्रीलंका दौरे पर गयें पाकिस्तानी पीएम का छीछालेदर

 


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने दो दिवसीय श्रीलंका दौरे पर हैं. उनका यह दौरा कई वजहों से सुर्खियों में है. पहला वजह यह है कि भारत ने पाकिस्तानी एयरफोर्स के हवाईजहाज को अपने एयर स्पेस में मंजूरी देकर दरियादिली दिखाई है. जबकि दो साल पहले प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका और सऊदीअरब की यात्रा के दौरान पाकिस्तान अपने एयर स्पेस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था. वैसे, इंटरनेशनल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के नियमों के मुताबिक, किसी भी देश को VVIP फ्लाइट्स को अपने एयर स्पेस में इज़ाज़त देनी होती है. खैर, भारत ने बिना किसी आपत्ति के अपने एयर स्पेस में मंजूरी देकर विश्व बिरादरी में अपनी छवि को बढ़ाया ही है.

दूसरा वजह, श्रीलंका के संसद में इमरान खान के भाषण पर रोक लगा दिया गया और अब श्रीलंकाई मुस्लिम सांसदों के साथ बैठक करने की अनुमति भी नहीं दी गई जो कि पहले से पाकिस्तान पीएम के इस दौर का हिस्सा था. श्रीलंका सरकार द्वारा अनुमति न देने के पीछे जो कारण समझ में आता है वो ये कि श्रीलंका कभी नहीं चाहेगा कि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान अपने भाषण के दौरान संसद में कुछ ऐसा बोल जाए जिसपर भारत को आपत्ति हो. वह भी तब जब श्रीलंका चीन से दूरी बनाते हुए अब भारत से रिश्ते मजबूत कर रहा है और भारत भी इस कोरोना महामारी में कोविड वैक्सीन को मुफ्त में देने से लेकर विभिन्न आर्थिक मोर्चों पर श्रीलंका की मदद कर रहा है और साथ खड़ा है. ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले ही भारत ने श्रीलंका को 5 लाख वैक्सीन मुफ़्त में भेजा है. ऐसे में श्रीलंका किसी भी कारणों से भारत को नाराज नहीं करना चाहेगा. 

 वहीं, श्रीलंकाई संसद में इमरान खान के भाषण कार्यक्रम को रद्द करने और मुस्लिम सांसदों से मिलने की मंजूरी न देने के पीछे दूसरे कयास भी लगाये जा रहे हैं. श्रीलंका में बौद्ध समुदाय की संख्या सबसे ज्यादा है और यहाँ मुसलमान को लेकर नाराजगी भी रही है. कुछ दिन पहले ही बौद्ध समुदाय ने मस्जिदों में जानवर की कुर्बानी का विरोध भी किया था और रोक के लिए रैलियां भी निकाली गई. कोरोना संक्रमण से मारे गए मुसलमानों के शव को दफनाने के बजाय जलाने के तोहमत भी श्रीलंका पर लगा जिसपर इमरान खान ने प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक मंच पर मुद्दे को उठाया और विरोध दर्ज किया. ऐसे में श्रीलंका के जेहन में यह बात जरूर होगी कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान श्रीलंकाई संसद के मंच से अपना एजेण्डा चलाने की कोशिश कर सकते हैं. 

सब मिलाकर देखा जाए तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का इस श्रीलंका दौरा में छीछालेदर ही हुआ.

Wednesday, January 27, 2021

दिरखा: शहर और वो

 बहुत दिनों बाद दिखी थी वो मुझे, 

जब अपने ही शहर में....कुछ निकला था ढूंढने

उसने देखा, मुस्कुराया और चल दिया, 

मैं भी ठहरा, कुछ सोचा और फिर मर गया!