Saturday, February 29, 2020

समाचार अपडेट

समाचार अपडेट
हिन्दू सेना के ऐलान के बाद शाहीनबाग में पुलिस मुश्तैद

हिन्दू सेना के चेतावनी के बाद दिल्ली के शाहीनबाग में आज सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दिया गया है. हिन्दू सेना ने ऐलान किया है कि रविवार को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से शाहीनबाग की सड़क खाली करा दी जाएगी. हिन्दू सेना के इस ऐलान के बाद किसी अनहोनी की संभावना को भांपते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है तथा पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है.
शाहीनबाग में 15 दिसम्बर 2019 से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. इसी बीच हिन्दू सेना के विष्णु गुप्त ने शनिवार को ट्वीट किया है कि दिल्ली पुलिस शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों को हटाने में पूरी तरह असफल रही. भारत के संविधान के आर्टिकल 14,19,21 के तहत वहाँ आम लोगों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है. हिन्दू सेना 1 मार्च 2020 को सुबह 10 बजे सभी राष्ट्रवादियों को ब्लॉक की गई सड़क को खाली कराने के लिए आमंत्रित करती है.

Thursday, February 27, 2020

'भूत' द हाॅन्टेड शिप: समीक्षा

'भूत': समीक्षा

फिल्म:  'भूत' द हाॅन्टेड शिप      फिल्म सर्टिफिकेट: व/A
निर्देशक: भानू प्रताप सिंह
निर्माता:  करन जौहर, शशांक खैतान
कलाकार: विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर, आशुतोष राणा, मेहेर विज, सिद्धांत कपूर इत्यादि.
संगीतकार: अखिल सचदेवा, केतन सोढा
निर्माण कंपनी: धर्मा प्रोडक्शन, जी स्टूडियोज़

भानू प्रताप सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म 'भूत- द हाॅन्टेड शिप' एक हाॅरर थ्रिलर फिल्म है. भानू प्रताप की यह डेब्यू फिल्म भी है. 
कहानी:
पृथ्वी (विक्की कौशल) एक शिपिंग ऑफिसर होता है जो अपने परिवार के एक हादसे में मारे जाने के अवसाद और अपने अकेलेपन से जूझ रहा होता है. तभी उसे समंदर के किनारे एक बड़ा जहाज के बारे में खबर मिलती है जो बिना उसके किसी क्रु मेंबर के सहारे अपने आप आ लगता है. पृथ्वी का बाॅस रिटायर होने वाला होता है, अत: जहाज के बारे में जांच-पड़ताल कराकर जहाज से छुटकारा पाना चाहता है.  पृथ्वी को जहाज के जांच-पड़ताल करने के दौरान अजीबोगरीब चीजों का अनुभव होता है. उसे पता लगता है कि सी वर्ड नाम का यह जहाज एक अरसे से हाॅन्टेड है और इसी के साथ और भी कई रहस्य की गुत्थी सुलझती जाती है जो भयावह होती है.
निर्देशन: 
भानू प्रताप सिंह का अच्छी निर्देशन की कोशिश बढ़िया है. लेकिन फिल्म में और भी बढ़िया निर्देशन की संभावना बरकरार है. फिल्म का जैसे जैसे अंत होता जाता है, भानू की निर्देशन ढीली पड़ती हुई नज़र आती है.
अभिनय: 
विक्की कौशल ने अपने किरदार का रोल बखूबी निभाया है तथा अपने अभिनय से स्वयं को सिद्ध किया है कि वे एक बेहतरीन अभिनेता हैं. बाकी सभी कलाकार भी अपने किरदार को निभाने में बेईमानी नहीं की है.
कमज़ोर कड़ी: 
  • फिल्म का निर्देशन और भी बेहतरीन ढंग से किया जा सकता था.
  • इंटरवल के बाद यह हाॅरर फिल्म दर्शकों को डराने में नाकामयाब साबित होती है.
  • फिल्म के अंत जैसे जैसे होता है, वैसे वैसे फिल्म का भूत भी एक मज़ाक बनकर रह जाता है यानि लोग डरने के बजाय हंसने लगते हैं.
स्टार रेटिंग (0/5

'भूत: द हाॅन्टेड शिप' फिल्म को अलार्म बटन 5 में से 2.5 स्टार देता है अर्थात (2.5/5) .

Wednesday, February 26, 2020

'नयी पौध' : समीक्षा

'नयी पौध' : समीक्षा

पुस्तक :           नयी पौध
पुस्तक लेखक :  नागार्जुन
प्रकाशक :        राजकमल प्रकाशन 
ISBN :           978-81-267-1376-9
मूल्य :              ₹ 125       

"घटकों और दलालों की कुछ मत पुछिए, वे अंधेरे में ही निशाना साधते हैं। रिश्तों की तुक शायद ही कभी ठीक बैठती हो… 

'नयी पौध' नागार्जुन द्वारा रचित अद्भुत कहानी है जो बेमेल शादी जैसे विकराल समस्या पर आधारित है, जिसमें कुछ युवाओं द्वारा बड़े- बुजुर्गों के रुढ़िवादी- संकीर्ण सोच के खिलाफ जाकर एक युवती की बेमेल शादी होने से बचा लिया जाता है.
खोखाई झा अपनी नतनी बिसेसरी की शादी के लिए वर ढूँढते हैं. बिसेसरी की माँ रामेसरी 13 साल से विधवा है और अपने पिता खोखाई झा के यहाँ ही रहती है. खोखाई झा की रोजीरोटी पड़िताई से हीं चलती है. सौराठ के मेले से खोखाई अपनी 15 वर्षीया नतनी बिसेसरी के लिए 60 वर्षीय चतुरानन चौधरी को वर के रूप में चयन करते हैं तथा शादी कराना चाहते हैं. चतुरानन चौधरी की यह पांचवीं शादी तय होती है अर्थात चौधरी चार शादी पहले ही कर चुके होते हैं. लेकिन गाँव के कुछ युवाओं जैसे माहे, दिगम्बर मल्लिक, दुर्गानंदन इत्यादि को यह शादी खटकती है तथा अपने ग्रुप के सदस्या बिसेसरी को इस जंजाल से निकालने के लिए प्रयास करते हैं एवं इसमें सफल भी होते हैं.
इस प्रकार की बेमेल शादी विभिन्न जागरूकता अभियान व कार्यक्रम के वजह से अब धीरे-धीरे कम हो गईं हैं या यूँ कहें तो मध्यमवर्गीय परिवार में देखने को नहीं मिलती है. लेकिन अब भी अक्सर उच्चवर्गीय सोसाइटी में बेमेल शादी की खबर देखने-सुनने को मिल जाती है.
कमज़ोर कड़ी:
  • लेखक 'नयी पौध' के इस कहानी में ग्रामीण परिदृश्य के कठिन शब्दों या फिर कहा जाये कि वैसे शब्द जो अधिक प्रचलित नहीं है, का चयन किया है जिससे सामान्य पाठक को समझने में कठिनाई हो सकती है.

Monday, February 10, 2020

मलंग : समीक्षा

'मलंग' : समीक्षा
फिल्म:  मलंग                 फिल्म सर्टिफिकेट: व /A
निर्देशक: मोहित सूरी
निर्माता: लव रंजन, भूषण कुमार, अंकुर गर्ग, कृष्णा कुमार व जे शेवक्रमनी 
कलाकार: आदित्य रॉय कपूर, दिशा पटानी, अनिल कपूर, कुनाल खेमू, एली एवराम, वत्सल सेठ इत्यादि। 
संगीतकार: असीम अजहर, अंकित तिवारी, वेद शर्मा, मिथुन
निर्माण कंपनी: टी-सीरीज़, Northern Lights Entertainment

भूमिका:
मोहित सूरी निर्देशित फिल्म मलंग एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म में दो कहानी एक साथ चलती है। केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा मलंग को A फिल्म सर्टिफिकेट प्राप्त है यानी इसे परिवार के साथ नहीं देखा जा सकता है। यह फिल्म वयस्कों के लिए है । 
कहानी:
कहानी की शुरुआत जेल कैदी के रूप में अद्वैत (आदित्य रॉय कपूर) से होती है। अद्वैत जिस रात जेल से छूटता है, उसी रात एक के बाद एक तीन पुलिस आफिसर को मार देता है और इससे पहले इंस्पेक्टर अंजनी आगाशे (अनिल कपूर) को इसकी जानकारी भी देता रहता है। जिस तीन पुलिस आफिसर को अद्वैत मारता है, वह तीनों माइकल (कुनाल खेमू) के दोस्त रहते हैं। माइकल स्वयं भी पुलिस आफिसर होता है और वह अपने आफिसर साथियों के हत्यारा अद्वैत को पकड़ना चाहता है। अत: माइकल इंस्पेक्टर आगाशे के साथ मिलकर इस काम में लग जाता है। अद्वैत इन पुलिस आफिसर को क्यों मारना चाहता है? इस रहस्य के लिए कहानी 5 साल पहले फ्लैशबैक में चलती है। 
अद्वैत गोवा ट्रिप्स पर होता है, जहाँ उसकी मुलाकात सारा (दिशा पटानी) से होती है। एक ही मुलाकात में अद्वैत व सारा एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और प्यार करने लगते हैं। सब ठीक चल रहा होता है, लेकिन क्रिसमस की एक रात की घटना दोनों की ज़िन्दगी को झकझोर कर रख देता है। सारा अपने एक दोस्त एलेक्सा (एली एवराम) के घर ठहरी होती है, जो सेक्स वर्कर होती है। माइकल एक रात एलेक्सा के घर आता है और सारा को एलेक्सा समझकर जोर-जबरदस्ती करता है। सारा का विरोध व अपनी नाकामयाबी से हताश होकर और अपनी कमज़ोरी को छुपाने के लिए माइकल सारा को जान से मारने की कोशिश करता है। इसमें माइकल के तीन पुलिस आफिसर दोस्त भी शामिल हो जाते हैं एवं अद्वैत पर ड्रग्स डीलर का आरोप मढ़ देते हैं। वहीं दूसरी तरफ सारा को मरने से उसकी दोस्त एलेक्सा बचा लेती है। 
इसी का इंतकाम जेल से छुटने के बाद अद्वैत लेना चाहता है और अंततः सारा के साथ मिलकर अद्वैत माइकल को मारने में कामयाब भी होता है। 
निर्देशन:
मोहित सूरी का निर्देशन बेहतरीन रहा है। फिल्म में कहीं-कहीं दर्शकों को हंसाने का भी प्रयास मोहित ने की है और वे इसमें कामयाब भी रहे हैं। इंटरवल के पहले काम और बढ़िया किया जा सकता था। 
अभिनय:
सभी कलाकार अपना रोल बखूबी निभाया है। अनिल कपूर इंस्पेक्टर आगाशे के रूप में बेहतरीन लगे हैं और अपने अभिनय से लोगों के दिल जीतने में कामयाब रहे हैं। कुनाल खेमू का भी अभिनय बढ़िया रहा है। 
संगीत:
संगीत भी बेहतरीन रहा है और फिल्म के सिन्स के अनुरूप है। मोहित सूरी निर्देशित फिल्म हो, एक्टर आदित्य रॉय कपूर हो और यदि अंकित तिवारी के आवाज में संगीत हो, तो फिर क्या कहना! 
कमज़ोर कड़ी: 
  • फिल्म की शुरुआत तो सही है लेकिन इंटरवल के पहले कहानी थोड़ी बोरिंग लगती है। यहाँ निर्देशक द्वारा और बढ़िया काम किये जाने की संभावना थी।
  •  कहानी के बीच में कैरेक्टर अद्वैत व सारा को खूब भागते हुये दिखाया गया है, ऐसा लगता है जैसे निर्देशक कहानी को अनायास खींचने का प्रयास किया है। 
स्टार रेटिंग (0/5) :     
मलंग फिल्म को अलार्म बटन 5 में से 3 स्टार देता है अर्थात (⅗).  ©