Wednesday, February 26, 2020

'नयी पौध' : समीक्षा

'नयी पौध' : समीक्षा

पुस्तक :           नयी पौध
पुस्तक लेखक :  नागार्जुन
प्रकाशक :        राजकमल प्रकाशन 
ISBN :           978-81-267-1376-9
मूल्य :              ₹ 125       

"घटकों और दलालों की कुछ मत पुछिए, वे अंधेरे में ही निशाना साधते हैं। रिश्तों की तुक शायद ही कभी ठीक बैठती हो… 

'नयी पौध' नागार्जुन द्वारा रचित अद्भुत कहानी है जो बेमेल शादी जैसे विकराल समस्या पर आधारित है, जिसमें कुछ युवाओं द्वारा बड़े- बुजुर्गों के रुढ़िवादी- संकीर्ण सोच के खिलाफ जाकर एक युवती की बेमेल शादी होने से बचा लिया जाता है.
खोखाई झा अपनी नतनी बिसेसरी की शादी के लिए वर ढूँढते हैं. बिसेसरी की माँ रामेसरी 13 साल से विधवा है और अपने पिता खोखाई झा के यहाँ ही रहती है. खोखाई झा की रोजीरोटी पड़िताई से हीं चलती है. सौराठ के मेले से खोखाई अपनी 15 वर्षीया नतनी बिसेसरी के लिए 60 वर्षीय चतुरानन चौधरी को वर के रूप में चयन करते हैं तथा शादी कराना चाहते हैं. चतुरानन चौधरी की यह पांचवीं शादी तय होती है अर्थात चौधरी चार शादी पहले ही कर चुके होते हैं. लेकिन गाँव के कुछ युवाओं जैसे माहे, दिगम्बर मल्लिक, दुर्गानंदन इत्यादि को यह शादी खटकती है तथा अपने ग्रुप के सदस्या बिसेसरी को इस जंजाल से निकालने के लिए प्रयास करते हैं एवं इसमें सफल भी होते हैं.
इस प्रकार की बेमेल शादी विभिन्न जागरूकता अभियान व कार्यक्रम के वजह से अब धीरे-धीरे कम हो गईं हैं या यूँ कहें तो मध्यमवर्गीय परिवार में देखने को नहीं मिलती है. लेकिन अब भी अक्सर उच्चवर्गीय सोसाइटी में बेमेल शादी की खबर देखने-सुनने को मिल जाती है.
कमज़ोर कड़ी:
  • लेखक 'नयी पौध' के इस कहानी में ग्रामीण परिदृश्य के कठिन शब्दों या फिर कहा जाये कि वैसे शब्द जो अधिक प्रचलित नहीं है, का चयन किया है जिससे सामान्य पाठक को समझने में कठिनाई हो सकती है.

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