मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा समाजवादी पार्टी को एक भी सीट न दिए जाने पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिफर पड़े। अखिलेश यादव ने नाराज होते हुए शुक्रवार को कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी को कोई सलाह या सुझाव नहीं दे रहा हूं लेकिन देश के सामने बड़ी चुनौती है। बीजेपी एक बड़ी पार्टी है और यह बहुत ही संगठित है। इसलिए किसी भी पार्टी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। भ्रम से लड़कर आप कोई चुनाव नहीं जीत पाएंगे। दरअसल अखिलेश यादव का कहना है कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को छह सीट देने पर सहमति जताई थी। लेकिन कांग्रेस ने जब उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तब उसमें एक भी सीट समाजवादी पार्टी के लिए नहीं दी गई। इसके उलट समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधायकों का भी टिकट काट दिया गया है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के साथ कौन खड़ा होगा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर गठबंधन सिर्फ 2024 में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए है तो इस पर विचार किया जाएगा। कांग्रेस जैसा व्यवहार सपा के साथ करेगी, उसके साथ वैसा ही किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से पत्रकारों ने इस संदर्भ में राय जाननी चाही तो 'छोड़ो... अखिलेश-विखलेश' कहते हुए सवाल से कन्नी काट ली।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच उत्पन्न कलह पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा का बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने चुटकी लेते हुए कहा कि अवसरवादी गठबंधन में स्वार्थ का टकराव होना था और ये हो गया। रविशंकर प्रसाद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'यह तो होना ही था, वे बीजेपी को हराने की कोशिश कर रहे हैं और उनके बीच एक-दूसरे के लिए कोई शिष्टाचार नहीं है।'
वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा का भी कांग्रेस-सपा कलह पर बयान सामने आया है। मनोज झा ने कहा कि 'चुनाव के दौरान ऐसा होता है, हर पार्टी की अपनी महत्वाकांक्षा होती है। मैं टाॅप लीडरशिप से आग्रह करूंगा कि इन सब को बेहतर ढंग से सुलझाया जाए क्योंकि लोग बहुत लालसा से इस विकल्प की ओर देख रहे हैं। हमारी कोशिश रहेगी कि इस तरह की छवि न आए।'
गौरतलब है कि 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के केंद्र सरकार के खिलाफ 28 विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर गठबंधन में लड़ने का फैसला किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस, आरजेडी के साथ साथ समाजवादी पार्टी समेत तमाम पार्टियां घटक इकाई के रूप में शामिल हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच ठनी विवाद गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
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